स्वास्थ्य और स्लेबस पर भारी ऑनलाइन क्लासेस


बच्चों का स्वास्थ्य और स्लेबस

इस समय स्कूलों और अविभावकों के सामने दोहरी चुनौती है. एक तरफ उन्हें बच्चों को पढ़ाना भी है और दूसरी तरफ उनके स्वास्थ्य का भी ध्यान रखना है. ऐसे में स्कूल इन दिशानिर्देशों को काफी फायदेमंद मान रहे हैं.

“स्क्रीन टाइम कम करने की ज़रूरत दो-तीन कारणों से है ”

“पहला, उनके पास अभिभावकों के फोन आ रहे थे कि बच्चे फोन और लैपटॉप का बहुत ज़्यादा इस्तेमाल कर रहे हैं. उनका घर में घुलना-मिलना बहुत कम हो गया है|

दूसरा, कई बच्चे ऐसे हैं जिनके भाई-बहन भी स्कूल में पढ़ते हैं लेकिन उनके घर में एक ही मोबाइल है. अब क्लासेस कम होने से सभी बच्चों को क्लास करने के ज़्यादा मौके मिल जाएंगे.”

इससे शिक्षकों को भी फायदा होगा क्योंकि उनका भी स्क्रीन टाइम और व्यस्तता बढ़ गई है. वो कम क्लास देंगे तो क्लास को बेहतर बनाने पर सोच पाएंगे. लेकिन, स्लेबस पूरा करने की चुनौती से स्कूल कैसे निपटेंगे, ,

“सभी को ये समझना होगा कि इस मुश्किल समय में शिक्षा को ज़ारी रखने की कोशिश की जा रही है ताकि ज़रूरी चीजें ना छूट जाएं. हम घर से स्कूल नहीं चला रहे हैं. हमें देखना है कि किस उम्र के बच्चे को हमें क्या पढ़ाना है और घर में माता-पिता के पास कितनी सुविधाएं हैं.”

“सीबीएसई स्कूल में पांचवी क्लास तक का स्लेबस निजी स्कूल निर्धारित कर सकते हैं. इसके अलावा वैकल्पिक कैलेंडर भी फोलो करने को बोला जा रहा है. नेशनल करिकुलम फ्रेमवर्क में बताया गया है कि किस स्तर पर बच्चे को कितना पता होना चाहिए. ज़रूरी नहीं है कि किसी टॉपिक के लिए 10-12 पन्नों को पढ़ाया जाए. टीचर उसे छोटा करके टॉपिक समझा सकता है. टीचर ऐसा करने की कोशिश भी कर रही हैं.”

कितनी फ़ायदेमंद होगीं क्लास

मेंटल हेल्थ एंड बिहेव्यरल साइंस विभाग के प्रमुख डॉक्टर मानते हैं कि ऑनलाइन क्लासेस ने बच्चों को एक रूटीन दिया है जो उनके मानसिक स्वास्थ्य के लिए अच्छा है. वो कहते हैं, “स्कूल ना खुलने से बच्चों का समय बर्बाद नहीं हो रहा है. एक सकारात्मक दिशा में जा रहा है. माता-पिता ने देखा होगा कि ऑनलाइन क्लास के बिना बच्चे देर से सो रहे थे और देर से जग रहे थे और उनका पूरा रूटीन बदल गया था. लेकिन, ऑनलाइन क्लास होने से अब उनकी दिनचर्या ठीक रहेगी. उन्हें व्यस्त रहने के लिए सही काम मिलेगा.”

“फिर एक बात ये है कि अभी कोई नहीं जानता कि स्कूल कब खुलने वाले हैं. अगर इसमें बहुत देरी होती है तो आगे चलकर बच्चों पर ही स्लेबस पूरा करने का दबाव आएगा. ऐसे में उनकी मुश्किल बढ़ जाएगी. इससे अच्छा है कि थोड़ा-थोड़ा करके अभी से ही आगे बढ़ें.”


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