ब्रा कब पहननी चाहिए


सूती और सस्ते कपड़ों से बनी सादी ब्रा, जो हलकी होती है, इनसे स्तनों का तापक्रम नहीं बढ़ता हैतरह-तरह की आकर्षक डिजाइनों की कलात्मक गर्म, मोटी, फोम युक्त, नायलोन आदि कृत्रिम रेशों से बनी सिंथेटिक, अधिक कसी हुई ताकि स्तनों का उभार स्पष्ट दिखाई दे, ऐसी ब्रा लाभ के स्थान पर हानि पहुंचाती है।

अत्यधिक कसी, मोटी और कृत्रिम रेशों की सिंथेटिक निर्मित ब्रा पहनने से स्तनों के ऊतक आवश्यकता से अधिक गर्म हो जाते हैं, जिससे वक्ष का कैंसर होने की संभावनाएं बढ़ जाती हैं। जो स्त्रियां नायलान आदि गर्म किस्म की ‘ब्रा ‘ कस कर बांधती हैं, उनके स्तनों में कैंसर होने की संभावना बढ़ जाती है, जबकि सूती व सामान्य किस्म की उचित प्रकार से पहनी गई ब्रा स्तनों को ज्यादा गर्माहट नहीं पहुंचाती करती, जिससे कैंसर की संभावना घट जाती है।

ब्रा के चुनाव व पहनने में यदि कुछ सावधानियां बरती जाएं, तो संभावित दुष्परिणामों से बचा जा सकता है।

स्तन स्त्री शरीर का अत्यंत कोमल अंग होता है, अत: ब्रा ऐसी ही पहनें, जो आरामदायक हो और स्तनों को सहारा देकर आकर्षण पैदा करे।

हर स्त्री को अपने नाप की सही फिटिंग वाली ब्रा ही पहननी चाहिए। वह न तो अधिक ढीली हो और न ही अधिक कसी हुई हो।

नायलोन फोम, मोटी सिंथेटिक वाली ब्रा न पहनें, जिससे कि आपके स्तनों को अधिक गर्मी, कसाव व तनाव मालूम पड़े। यदि किसी कारणवश पहनना ही पड़े, तो कुछ घंटों के बाद उतार दें।

सोते समय स्तनों को ढीला छोड़ें, ब्रा न पहनें।

जहां तक हो सके, ब्रा हमेशा सूती, नर्म कपड़े की बनी हुई ही पहनें, ताकि उसमें पसीना सोखने की उचित क्षमता हो। इससे स्तनों की शीतलता कायम रहेगी ।

गर्भवती व प्रसूता महिलाओं के लिए उपलब्ध मैटरनिटी ब्रा का उपयोग करें और इस दौरान स्तनों में हुई 7 से 10 सेंटीमीटर तक की वृद्धि के हिसाब से नई ब्रा खरीदें, पुराने वाली ब्रा पहनने की कोशिश न करें, अन्यथा स्तनों को नुकसान पहुंच सकता है।

स्नानादि से पहले जैतून के तेल की मालिश गोलाई में हाथ चलाते हुए उरोजों पर कीजिए। तत्पश्चात एक-एक भुजा को सीधा तानकर गोलाई में घुमाइए। यह प्रक्रिया कम से कम दस बार कीजिए। फिर फव्वारे से नीचे बैठकर अथवा बाल्टी में पानी भरकर खुलकर स्नान कीजिए। इससे उरोज विकसित होंगे और रक्त संचार में तीव्रता आ जाएगी।

स्तनपान कराने वाली महिलाओं को चाहिए कि वे बच्चे को कभी भी लेट कर स्तनपान न कराएं। इससे स्तन खिंचकर ढलक जाते हैं। अत: हमेशा बैठकर स्तन को हाथ का सहारा देकर ही बच्चे को स्तनपान करना चाहिए।

भारी व बेडौल उरोजों को ठीक करने के लिए प्लास्टिक सर्जरी का सहारा भी लिया जा सकता है। इस उपचार के लिए जनरल एनस्थीसिया देकर बड़ा ऑपरेशन किया जाता है। इसमें भारी व बेड़ौल उरोजों को छीलकर अनावश्यक मांस निकाल दिया जाता है। अविकसित उरोजों को विकसित करने के लिए उस महिला की रान से मांस लेकर अथवा सिलिकान इंटलांट लैग भरकर उन्हें आकार व उभार दे दिया जाता है।


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