सुखी दाम्पत्य जीवन के लिए जरुरी हे ये विशेषताएं


हिन्दू धर्म शास्त्र हिन्दू धर्म शास्त्र इंसानी जीवन के हर एक पहलू को अपने भीतर समाहित करते हैं। अगर देखा और समझा जाएं तो इनके आधार पर जीवन व्यतीत कर ना सिर्फ हम अपने जीवन की बड़ी-बड़ी परेशानियों को सुलझा सकते हैं, हमें किसी समस्या का सामना ना करना पड़े इसकी भी गारंटी हमें ये शास्त्र मुहैया करवाते हैं।

विवाह मनुष्य जीवन की बात चली ही है तो जन्म और मृत्यु के अलावा हमारे जीवन का एक अन्य मुख्य पड़ाव होता है विवाह।

विवाह की सफलता यह वो पड़ाव है जिसके लिए हम पहले से ही खुद को तैयार करते हैं और बाद में हमारी पूरी जिन्दगी का बदलाव भी यही पड़ाव साबित होता है। विवाह की सफलता और असफलता ही हमारे आगामी जीवन की नींव होती है।

समाज में विवाह हिन्दू धर्म और समाज में विवाह को बहुत महत्व दिया गया है, यही वजह है कि इस संबंध को त्यागना, जिसे आम बोलचाल में तलाक कहा जाता है इतना आसान नहीं होता।

जीवन भर का साथ विवाह को जीवन भर का साथ करार दिया गया है और इसी महत्ता को ध्यान में रखते हुए आपने देखा होगा कि परिवार के बड़े-बुजुर्ग यह कहते हैं कि हमेशा सोच-विचारकर ही इस संबंध को अपनाना चाहिए। विवाह से पहले कुंडली मिलान तो आवश्यक है ही लेकिन जिससे आप विवाह करने जा रहे हैं, उसके बारे में आशवस्त होने के बाद ही विवाह की मंजूरी देनी चाहिए।

हमारे शास्त्र बड़े-बुजुर्गों के अलावा हमारे शास्त्र भी कुछ ऐसी बातें कहते हैं जिनका ध्यान अगर रखा जाए तो अपने लिए जीवनसाथी का चुनाव करने में आपसे भूल नहीं होगी।

स्वर्ग कहते हैं एक स्त्री ही घर को स्वर्ग बना सकती है और अगर चाहे तो वहीं नर्क में भी तब्दील कर सकते हैं।आजकल भले ही महिलाएं आत्म निर्भर हो रही हों, खुद बाहर निकलकर पुरुषों की तरह काम करही हों लेकिन इसके बावजूद घर को संभालने जैसे उसके गुण को कभी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

पुरुषों का दायित्व वहीं पुरुषों का दायित्व होता है अपनी पत्नी और परिवार की हर जरूरत को पूरा करते हुए उन्हें हर खुशी मुहैया करवाना।

स्त्री के गुण  शास्त्रों के अनुसार विवाह करने से पहले स्त्री और पुरुष की किन खूबियों की ओर विशेष ध्यान देना चाहिए, ताकि आपकी अर्धांगिनी आपके घर को स्वर्ग बनाकर रखे। सबसे पहले जानते हैं स्त्री के गुणों के बारे में।

प्रबंधन के गुण हिन्दू शास्त्रों के अनुसार एक स्त्री को घर को संभालना, बच्चों से प्रेम करना और बड़े-बुजुर्गों का सम्मान करना आना चाहिए।

मानसिक सहारा स्त्री को मानसिक रूप से मजबूत होना चाहिए। उसे इस काबिल होना चाहिए कि वे अपने पति और परिवार को कष्टप्रद हालातों में भी संभाल सके, उन्हें भावनात्मक समर्थन दे सके।

मजबूत मानसिकता स्त्री को मानसिक तौर पर मजबूत होना चाहिए। उसे एक अच्छा श्रोता होने के साथ-साथ परिवार के प्रति पूर्ण रूप से समर्पित होना चाहिए।

ईश्वर से जुड़ाव स्त्री के भीतर की आध्यात्मिकता और ईश्वर के साथ उसका जुड़ाव परिवार को मुश्किल हालातों से उबारने का कार्य करता है। स्त्री को धार्मिक अवश्य होना चाहिए।

जीवनभर का साथ स्त्री को इस बात की समझ अवश्य होनी चाहिए कि विवाह जैसा संबंध जीवनभर का साथ होता है। उसका समर्पण उसके परिवार और पति के लिए हमेशा के लिए होना चाहिए। उसके भीतर ये बहवना अवश्य होनी चाहिए कि यह संबंध उसे खुशी और आत्मीयता से निभाना है।

समर्पण अब बारी पुरुषों की, पुरुषों के भीतर सबसे पहला और बड़ा गुण होना चाहिए अपनी पत्नी के प्रति उसके समर्पण की भावना। उसे एक आदर्श पति की भूमिका का निर्वाह अवश्य करना चाहिए।

कोई भेद नहीं होने चाहिए ऐसे पुरुष जो अपनी पत्नी से कोई भेद नहीं रखते, उससे कुछ नहीं छिपाते वहीं विवाह के लिए सबसे उपयुक्त माने गए हैं।

धार्मिक स्त्री हो या पुरुष, दोनों को धार्मिक अवश्य होना चाहिए। उनका पवित्र आचरण परिवार के लिए लाभदायक साबित होता है।

धैर्य पुरुषों के भीतर धैर्य को सबसे बड़ी प्राथमिकता दी गई है। उनका धैर्य, पारिवारिक जीवन मंं आने वाली बड़ी से बड़ी परेशानी को भी सुलझा सकता है।

दृढ़ निश्चयी पुरुष को मानसिक तौर पर मजबूत और दृढ़निश्चयी होना चाहिए। धनोपार्जन के लिए उसे पूर्ण रूप से सक्षम होना चाहिए ताकि वे अपने परिवार की जरूरतों को पूरा कर सके।

परिवार के लिए प्रेम पुरुष के भीतर अपने परिवार के लिए प्रेम, सम्मान अवश्य होना चाहिए। इसके अलावा वह अपने परिवार की रक्षा करने वाला भी होना चाहिए।


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