प्रसन्न रहना चाहते हैं तो जीवन में करे ये बदलाव


कौन है जो प्रसन्न रहना नही चाहता ? हम सभी प्रसन्न रहना चाहते हैं | प्रसन्न रहने के लिए हम क्या कुछ नही करते लेकिन फिर भी कई बार सफलता नही मिलती जितना प्रसन्नता की तरफ दौड़ते हैं   प्रसन्नता और हम में अंतर बढ़ता जाता है यदि जीवन में हम सचमुच प्रसन्न रहना चाहते हैं और हमेशा प्रसन्न रहना चाहते हैं तो निम्न लिखित बातों पर ध्यान देने का प्रयास करें –  

अपनी स्वीकार्यता बढ़ाएं वास्तव में कोई भी स्थिति बहुत अच्छी और बहुत बुरी नही होती ,हर स्थिति को स्वीकार कर उससे प्रसन्नता पाने का प्रयास करें | जीवन में हमारी जितनी अधिक स्वीकार्यता होगी उतना ही अधिक आनंद हम पाएंगे क्योंकि अप्रिय या विषम परिस्थितियां सदैव नही रहती |

दृष्टिकोण में परिवर्तन करें – प्रसन्न रहने के लिए अपने दृष्टिकोण में परिवर्तन करना अनिवार्य हैं , सकारात्मक दृष्टिकोण से युक्त व्यक्ति ही वास्तव में प्रसन्न रह सकता है किसी भी वस्तु या स्थिति से कोई भी व्यक्ति खुश रह सकता है तो मैं और आप क्यों नही रह सकते? जीवन में दृष्टिकोण में परिवर्तन द्वारा  यह आसानी से किया जा सकता हैं |

प्रकृति के सानिद्ध्य में अधिक समय व्यतीत करें जब भी मौका मिले तो प्रकृति के निकट जाने का प्रयास करे, बागबानी अथवा किचन गार्डनिंग करना न केवल हमारी रचनात्मकता में वृद्धि करता है अपितु उस रचनात्मकता से प्रसन्नता भी मिलाती है | 

बच्चों के साथ समय व्यतीत करे  बच्चों के साथ समय व्यतीत करना अचूक नुस्खा है हम अपना बचपन वापस नही लौटा सकते लेकिन बच्चों के साथ समय गुजारने पर उसका आनंद अवश्य ले सकते हैं | बच्चों के साथ समय बिताना प्रसन्नतादायक होता है |

दुसरे की प्रसन्नता का ध्यान रखे  यदि वास्तव में स्वयं प्रसन्न रहना चाहते है तो दुसरो की प्रसन्नता का ध्यान रखना भी जरुरी है,यदि हमारे आस – पास गर्मी होगी तो हमें भी गर्मी लगेगी, ठण्ड होने पर ठण्ड लगेगी | यदि हमारे आस पास  के लोग प्रसन्न नही होंगे तो प्रसन्नता हम से भी कोसों दूर रहेगी |

सबसे प्रेम करें – प्रेम जीवन का अनिवार्य तत्व है | इसका मूल्य आंकना असंभव हैं | संसार में जितना  प्रेम बढेगा लोग उतने ही संतुष्ट, सुखी व आनंदमय अनुभव करेंगे | सबसे प्रेम कीजिये | मन से प्रेम कीजिये | प्रेम में कोई लेनदेन न हो अपितु वह निस्स्वार्थ भाव से किया गया हो |जब हम निस्स्वार्थ व निश्छल प्रेम करेंगे तो लोग भी हमें वैसा ही प्रेम देंगे | जिससे हमारी प्रसन्नता में वृद्धि होगी |

बड़े – बुजुर्गों की मदद करें – बड़े बच्चों और बुजुर्गों की मदद करना हमरा दायित्व है | ये कार्य घर से प्रारंभ कर दीजिये | बड़े बुजुर्गों की सेवा करने से असीम सुख की प्राप्ति होती हैं उनके आशीर्वाद से आरोग्य एवं दीर्घायु की प्राप्ति होती है | जो लोग बड़े बुजुर्गों की मदद करते है ,समाज में उनको सम्मान मिलता है ये सम्मान भी प्रसन्नतादायक होता है |

शिष्टाचार व नम्रतापूर्ण व्यवहार करें – शिष्टाचार व नम्रतापूर्ण  व्यवहार भी व्यक्ति की प्रसन्नता के लिए अनिवार्य है इससे न केवल घर परिवार में अपितु कार्यस्थल व समाज में भी अच्छा माहोल बनता है | निरर्थक विवाद उत्त्पन्न नही होते | जिससे व्यक्ति गुस्से व तनाव से बचा रहता है | शिष्टचार व नम्रता पूर्ण व्यव्हार से व्यक्ति की मित्रता का दायरा भी विस्तृत होता है |

जीवन में सहजता व सरलता अपनाएं – जीवन में सरलता व सहजता का बहुत महत्त्व है | हम जितने सहज व सरल होते उतने ही अधिक प्रसन्न रह सकते है | जीवन में असहजता व कृत्रिमता से तनाव उत्पन्न होता है जो हमारी प्रसन्नता का सबसे बड़ा शत्रु है |

स्वच्छता व सुन्दरता का ध्यान रखें – स्वच्छता न केवल हमें रोग मुक्त रखने में सहायक है अपितु उससे व्यक्ति को सुकून भी मिलता है | साफ सुथरा व व्यवस्थित घर तथ बेडरूम व्यक्ति को तनाव मुक्त रखने में सहायक होता है | उसे अच्छी नींद आती है जो प्रसन्नता प्रदान करने से सक्षम होती है |

रचनात्मकता व सृजनात्मकता का विकास करें – रचनात्मकता के अनेक रूप हैं ,हर काल में रचनात्मकता  होती है | संगीत, नृत्य, पेंटिंग, अभिनय, गायन, वादन, लेखन एवं खेल इत्यादि | ये सभी व्यक्ति की सृजनात्मकता विकसित कर उसे प्रसन्नता प्रदान करेने में सक्षम हैं |

केवल अच्छा साहित्य पढ़ें – ये खुबसूरत दुनिया टाइम पास करने के लिए नही है | प्रेरणास्पद, ज्ञानवर्धक व उपयोगी साहित्य ही पढ़ें , ऐसा साहित्य जीवन में सकारात्मकता का विकास करेगा व हमारे अन्दर उत्साह का संचार करेगा | इससे हमें आगे बढ़ने में सहायता मिलेगी | जो लोग गन्दा सहित पढ़ते हैं उनकी मानसिकता भी वैसी ही हो जाती है |

दिल खोल कर हँसे – जब भी मौका मिले दिल खोल कर हँसे | गंभीरता व मायूसी रूपी व्याधियों को जड़ से मिटा कर प्रसन्नता प्रदान करने मे हंसी से बढ़ कर औषधि नही है | विभिन्न चिंताओं को अलविदा कहने का श्रेष्ठ उपाय है हंसी |

समाज को सुन्दर बनाने का प्रयास करें जो लोग दुसरे के जीवन में आनंद भर देने का प्रयास करते हैं प्रसन्नता उनके अपने जीवन से कैसे दूर रह सकती है? व्यक्ति समाज का अभिन्न अंग है ,वह जैसे समाज की रचना करेगा उसे में उसे रहना भी होगा हर तरह से समाज को अच्छा बनाने का प्रयास कीजिये अच्छे समजा में रहेंगे तो न केवल उसका लाभा मिलेगा अपितु प्रसन्नता भी प्राप्त होगी |

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