स्वच्छ वस्त्रों का आध्यात्मिक प्रभाव


जिस प्रकार स्नान करने के उपरान्त शरीर के त्वचा रंध्र खुल जाने से और घर्षण से एक प्रकार की स्फूर्ति प्राप्त होती है | उसी प्रकार स्वच्छ और नवीन वस्त्रों को धारण करने से मनुष्य की आत्मा को प्रसन्नता प्राप्त होती है | आत्मा का गुण स्वच्छता है | वह विकार ,दुर्गुण सब प्रकार के मल पदार्थों से मुक्त है | उसमे गन्दगी टिक नही सकती | पाप -पंक का उस पर छींटा पड नही सकता | यदि कोइ वस्तु पंकिल करने का उद्योग करती है तो हमारी अन्तरात्मा में पश्चाताप और आत्मग्लानि की चीत्कार उठती है कोई भी दुर्विचार , पापमय कल्पना , कुत्सित वासना हमारी नैतिकता से हेय निकृष्ट भावना, जब मन क्षेत्र में प्रविष्ट होकर हमारे सत्य प्रेम, कर्तव्य,और  निष्ठा को विश्रखलित कर देती है ,तब आत्मा में एक आतंरिक अघात का हम सब अनुभव करते हैं | इसका कारण क्या है ? आत्मा द्वारा हमें किसी भी ऐसे अनैतिक कार्य के लिए सहयोग प्राप्त नही हो सकता जो किसी भी प्रकार की कायिक, वाचिक, अथवा  मानसिक गन्दगी से युक्त हो | गन्दी धारणाएं या अश्लील कृत्य करने वाले आत्मा की ध्वनि की अवहेलना कर गंदे कार्यों में प्रविष्ट होते हैं किन्तु अन्दर ही अन्दर उन्हें एक मनोव्यथा दुखी करती रहती है |कुछ काल के लिए आप इस आतंरिक ध्वनि का दमन भले ही कर दें इसका पवित्र कार्य निरंतर चलता रहता है | आत्मध्वनि का कार्य है कि अंतर्मन में सफाई का कार्य करना | जो गंदे विचार मंत्रणायें या कल्पनाएँ आयें उन्हें  गन्दगी से हटा कर नीर -क्षीर विवेक द्वारा मनुष्य को सद्पथ की और अग्रसर रखना जो व्यक्ति आत्मध्वनि को सुनता है उसे आत्मध्वनि  सीधा मार्ग दिखाती चलती है | उसके मन क्षेत्र में सर्वत्र स्वच्छता होती है जहाँ कोई गन्दा विचार विद्रोही की भाँति उदित होता है वही मन की शुभ वृत्तियाँ उससे संघर्ष कर उसे निकाल  बाहर करती हैं | चूंकि स्वच्छता हमारी आत्मा का नैसर्गिक गुण है अतः वाह्य स्वच्छता से भी परितुष्टि एवं प्रसंन्नता प्राप्त होती है | स्वच्छ वातावरण का प्रभाव स्वास्थ्य , प्रसंन्नता , और आतंरिक आल्हाद का देने वाला है | स्वच्छ वातावरण की सृष्टि करने में  मनुष्यों के वस्त्रों का बड़ा सम्बन्ध है | वस्त्र उसके शरीर से निकटतम संपर्क रखते हैं उनके अनुसार उसकी अन्तःवृत्ति का निर्माण होता चलता है | यदि उनमे स्वच्छता है तो स्वभावतः मन में पवित्र विचारों का क्रम चलने लगता है | विचार प्रवाह स्वयं पवित्रता और सात्विकता की और बहता है | गन्दगी से विचार उतने ऊँचे नही उठ पाते उनकी नैतिकता को अप्रत्याशित चोट लगती है | गंदे वस्त्रों के संपर्क में रहते रहते उसकी उच्च शक्तियां धीरे धीरे पंगु हो जाती हैं | महात्मा गाँधी जी का विश्वास था कि खद्दर के स्वच्छ वस्त्र पहन कर भी वे सत्य न्याय अहिंसा विश्व बंधुत्व के पवित्र विचारों से प्रेरित हो जाते थे | प्रत्येक  सत्याग्रही को खद्दर पहनना चाहिए | खद्दर और विचारों की पवित्रता का निकट का सम्बन्ध है |  वातावरण की स्वच्छता और वस्त्र की स्वच्छता मन की स्वच्छता उत्पन्न करने वाली है |  जो व्यक्ति स्वच्छ रहने का अभ्यस्त है उसके विचारों का स्तर गंदे वस्त्रों वालों से उंचे रहते  है | स्वच्छता  देवत्व का सामीप्य है |( cleanliness is next to godliness) इस युक्ति में महान सन्देश भरा है| स्वच्छता क्रमशः देवत्व के समीप हमें ले जाती है | देवताओं का एक विशिष्ट गुण स्वच्छता है | स्वच्छ रह कर आप वातावरण की दृष्टि से देवत्व के समीप पहुँच जाते हैं | स्वच्छता एक आदत है , यदि एक बार आदत डाल दी जाए वह जीवन भर मनुष्य उसे नहीं भूलता है |

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