Attitude Shayri

हाथ में खंजर ही नहीं आँखों में पानी भी चाहिए, हमें दुश्मन भी थोड़ा खानदानी चाहिए।



सर झुकाने की आदत नहीं है, आँसू बहाने की आदत नहीं है,

हम खो गए तो पछताओगे बहुत, क्युकी हमारी लौट के आने की आदत नहीं है!


इतनी पीता हूँ कि मदहोश रहता हूँ, सब कुछ समझता हूँ पर खामोश रहता हूँ,

जो लोग करते हैं मुझे गिराने की कोशिश, मैं अक्सर उन्ही के साथ रहता हूँ।


आँख उठाकर भी न देखूँ, जिससे मेरा दिल न मिले, जबरन सबसे हाथ मिलाना, मेरे बस की बात नहीं..


रहते हैं आस-पास ही लेकिन साथ नहीं होते… कुछ लोग जलते हैं मुझसे बस खाक नहीं होते।


तेरी मोहब्बत मैं और मेरी फितरत मैं फर्क इतना है की…. तेरा Attitude नही जाता और मुझे झुकना नहीं आता…



हुकुमत वो ही करता है जिसका दिलो पर राज हो!! वरना यूँ तो गली के मुर्गो के सर पे भी ताज होता है!!



अभी सूरज नहीं डूबा जरा सी शाम होने दो, मैं खुद लौट जाऊंगा मुझे नाकाम तो होने दो, मुझे बदनाम करने का बहाना ढूंढ़ता है जमाना !! मैं खुद हो जाऊंगा बदनाम पहले मेरा नाम तो होने दो!!


आग लगाना मेरी फितरत में नही है ..मेरी सादगी से लोग जलें तो मेरा क्या कसूर ..!!


राज तो हमारा हर जगह पे है। पसंद करने वालों के “दिल” में और नापसंद करने वालों के “दिमाग” में।


ज़िन्दगी हसीन है ज़िन्दगी से प्यार करो, हो रात तो सुबह का इंतज़ार करो,


वो पल भी आएगा  जिस पल का इंतज़ार हैं आपको, बस रब पर भरोसा और वक़्त पे ऐतबार करो।



किस्मत से लड़ने में मजा आ रहा है ये मुझे जितने नहीं देगी और हार मैं मानुंगा नहीं


हमे खरीद ने की कोशीश मत हमे खरीद ने की कोशीश मत करना पगली

हम उन पुरखो के वारीस है जिन्होने मुज़रे मे हवेलीया दान करदी


औकात क्या है तेरी ए जिँदगी चार औकात क्या है तेरी ए जिँदगी चार दिन कि मुहोब्बत तुझे तबाह कर देती है


मेरी तारीफ करे या मुझे बदनाम करे.. जिसको जो बात करनी है सरेआ़म करे..!!


पीठ पर खंजर तो सभी ने घोपा है….अगर हिम्मत रखता था…तो मेरे मुस्कुराते चेहरे के सामने आकर मुझ पर वार करता”


मेरे दिल में भी एक मुसाफिर रहता था.. . . एक रोज़ सामान उठाया और निकल गया


सुनो… . . . तुम मेरी हर post पे आते हो . . . तो क्या मैं रिश्ता पक्का समझू ?


बंजर नही हुं मै मुझमे भी नमी है दर्द बयां नही करती बस इतनी सी कमी है !!


जहाँ पर, उजाले भी खत्म हो जातें हैं ! अक्सर वहाँ भी, उसके चाहने वाले मिल जातें हैं !!


हाथ क्या मिलाया कुछ दोस्तों से….!!, कमबख्त दुःख की सारी लकीरें मिटा गये !!


उफ्फ्फ्फ़…. कयामत है उनका इश्क भी मोहब्बत भी करना चाहते है… वो भी दोस्ती की आड़ मे


मुख़्तसर सी इस जिन्दगी में रक्खा क्या है ग़र इश्क भी यहाँ ऐब़ है.. तो अच्छा क्या है..


लोग पूछते हैं, मैं क्या करती हूँ… उन्हें क्या बताऊँ… मोहब्बत की थी, अब रोज मरती हूँ…-…