Dard Shayari

भरम रहने दो इन नकाब जैसे दुपट्टों और हेलमेटों का ग़ालिब ना जाने कितने माँ बापों को यकीन है कि बच्चे कोचिंग ही गये हैं

कौन कहता है के वो मुझसे बिछड़कर खुश है जरा उसके सामने मेरा नाम तो लेकर देखो

जिंदगी मोहताज नहीं मंज़िलों की वक्त हर मंजिल दिखा देता है; मरता नहीं कोई किसी की जुदाई में वक्त सबको जीना सिखा देता है।

मौत से कहना की हम से नाराजगी खत्म कर ले वो लोग ही बदल गए जिन के लिए हम जिया करते थे

आपको पाकर खोना नहीं चाहते; इतना खुश होकर अब रोना नहीं चाहते; ये आलम हैं हमारा आपकी जुदाई से; आँखों में नींद है मगर हम सोना नहीं चाहते।

गलतियों से जुदा तु भी नहीं मैं भी नहीं; दोनों इंसान हैं ख़ुदा तु भी नहीं मैं भी नहीं; गलतफहमियों ने कर दी दोनों में पैदा दूरियां; वरना फितरत का बुरा तु भी नहीं था मैं भी नहीं।

ज़रा देखो ये दरवाज़े पर दस्तक किसने दी है अगर इश्क़ हो तो कहना यहाँ दिल नही रहता

ज़ुबान खामोश आँखों में नमी होगी; ये बस एक दास्तां-ए ज़िंदगी होगी; भरने को तो हर ज़ख्म भर जाएगा; कैसे भरेगी वो जगह जहाँ तेरी कमी होगी।

बहुत चाहा पर उन्हें भुला ना सके; ख्यालों में किसी और को ला ना सके; किसी को देख कर आंसू तो पोंछ लिए; पर किसी को देख कर हम मुस्कुरा ना सके।

कोई रिश्ता नया या पुराना नहीं होता ज़िंदगी का हर पल सुहाना नहीं होता जुदा होना तो किस्मत की बात है पर जुदाई का मतलब भुलाना नहीं होता

अगर प्यार में जुदाई न होती तो प्यार की अहमियत समझ में आई न होती; ज़िन्दगी के हर सफर में अगर साथ होता तो मोहब्बत के रास्ते में इतनी गहराई न होती।

रोती हुई आँखो मे इंतेज़ार होता है ना चाहते हुए भी प्यार होता है क्यू देखते है हम वो सपने जिनके टूटने पर भी उनके सच होने का इंतेज़ार होता है

निकलता नहीं है कोई दिल में बस जाने के बाद; दिल दुखता है बिछड़ जाने के बाद; पास जो होता है तो क़दर नहीं होती उसकी; महसूस होती है कमी उनके दूर जाने के बाद।

जिस घड़ी तेरी यादों का समय होता है; फिर हमें आराम कहाँ होता है; हौंसला नहीं मुझमें तुम्हें भुला देने का; काम सदियों का है यह लम्हों में कहाँ होता है।

सामने ना हो तो तरसती हैं ये आँखें; बिन तेरे बहुत बरसती हैं ये आँखें; मेरे लिए ना सही इनके लिए ही आ जाओ; क्योंकि तुमसे बेपनाह प्यार करती हैं ये आँखें।

कोई रास्ता नहीं दुआ के सिवा; कोई सुनता नहीं यहां खुदा के सिवा; मैंने भी जिंदगी को बहुत करीब से देखा है; मुश्किल में कोई साथ नहीं देता आंसुओं के सिवा।

वो रोए तो बहुत पर मुझसे मुंह मोड़कर रोए; कोई मजबूरी होगी तो दिल तोड़कर रोए; मेरे सामने कर दिए मेरे तस्वीर के टुकड़े; पता चला मेरे पीछे वो उन्हें जोड़कर रोए!

ग़म में हँसने वालों को कभी रुलाया नहीं जाता; लहरों से पानी को हटाया नहीं जाता; होने वाले हो जाते हैं खुद ही दिल से जुदा; किसी को जबर्दस्ती दिल में बसाया नहीं जाता।

क्या गज़ब है उसकी ख़ामोशी; मुझ से बातें हज़ार करती है।

जान मेरी तू क़त्ल कर दे मुझे; पर छोड़ जाने का जुल्म ना करना।

तुम्ही आकर थाम लो ना मुझेसब तुम्ही आकर थाम लो ना मुझे   सब ने छोड़ दिया है मुझे तेरा समझकर

न हाथ थाम सके न पकड़ सके दामन; बहुत ही क़रीब से गुज़र कर बिछड़ गया कोई।

तेरे बगैर भी तो ग़नीमत है ज़िन्दगी; खुद को गँवा कर कौन तेरी जुस्त-जू करे।

किस किस को बताएँगे जुदाई का सबब हम तू मुझ से ख़फ़ा है तो ज़माने के लिए आ।

हमने गुज़रे हुए लम्हों का हवाला जो दिया हँस के वो कहने लगे रात गई बात गई

ये फ़ासले तेरी गलियों के हमसे तय ना हुए; हज़ार बार रुके हम हज़ार बार चले।

हर मुलाक़ात का अंजाम जुदाई क्यों है; अब तो हर वक़्त यही बात सताती है हमें।