Geet Gajal

इश्क निगाहों से बरसता है उसकी, अब बचेगा कौन ? गर मैं भी जी गया तो यारों फिर मरेगा कौन..? सुर्ख लबों से पिलाती है आजकल वो जाम मुझको , बंद कर दो ये मयखाने, अब यहां पियेगा कौन..?

हां #हमने_ही चाहा कि मै तेरी हो जाऊं तूने तो कभी चाहा ही नहीं तू कहा करता था ना हमसे गलतियां #हमने_ही की है फ़िर दूरियां बढ़ा रही तो ये नज़दीकियां कैसी.? छोड़ कर जाने से पहले तुझे मेरी परवाह नहीं थी बरसो बाद फ़िर आज ये मेरी फ़िकर कैसी..?

#तुम_चाहो_तो   पैर जमी पर रख आसमान छू ले #तुम_चाहो_तो चाँदनी छाँव में कुछ वक्त गुजार ले #तुम_चाहो_तो जो तुम चाहो वही बात करे #तुम_चाहो_तो   फ़लक तक साथ चलने का वादा करे #तुम_चाहो_तो ज़िंदगी संग संग गुजारने की तरफ एक कदम बढाये #तुम_चाहो_तो

राख़ में सो गई हिलाओ ज़रा आग रोशन हो , गुदगुदाओ ज़रा आफ़ताब एक उठा के लायें चलो जरा

मैं भी चलता हुँ, तुम भी आओ ज़रा… नाम अपना बताऊंगा पहले अपना मज़हब बताओ ज़रा… एक ओंकारा, ला इलाह इलल्लाह सूफियों संग गुनगुनाओ ज़रा…

हर किसी के अपने अपने गम हैं हर किसी को गम हैं अपने अपने कोई सह जाता है कोई कह जाता है पर कुछ दुख न सहे जाते हैं ओर न कहे जाते हैं कारण कौन सुनेगा किसको सुनाए… ,

इसलिए चुप रहते हैं… हमसे अपने रूठ न… , जायें इसलिए चुप रहते हैं

छिटक कर टूटी बूँदो ने सवाल किया मेरा क़सूर क्या सिर्फ़ रूखसार से प्यार किया ? एक हसीन चेहरे को छूँ लूँ मैं मैंने भी तो कितना इंतज़ार किया ! इश्क़ हक़ है हमारा भी गुलों से बिखरे तो काँटों ने वार किया भोर में गीले पत्ते तोड़ दे मुझको क़दमों के नीचे मैंने प्यार किया !

इश्क़ ना सही दोस्ती ही निभाया करो   कभी बिन कहे भी, ऐसे ही चले आया करो   रूठती नहीं हूं मैं कि डर है तुम मनाओगे नहीं   कभी ये भी करो कि यूं ही मुझे मनाया करो   मुझसे ना मिलने के तुम्हे बहाने हजार आते हैं मुझसे मिलने को भी कभी बहाने बनाया करो…

प्यार की सबके लिए अलग अलग भाषा है कहीं सच्चा प्यार कहीं सिर्फ तमाशा है घंटो साथ है कहीं मिलने की सिर्फ आशा है

प्यार में एक दूसरे पा लेना जरुरी तो नहीं प्यार तो खुद को खो देने का एहसास है प्यार करना इतना भी आसान होता नहीं प्यार तो साधना समर्पण और विश्वास है

ढलता हुआ सूरज जाते-जाते देकर गया एक संदेश! कि प्रकृति ने अपना सौंदर्य   प्रत्येक वस्तु में बसा रखा है! जैसे उगते हुए सूरज में सौंदर्य की पराकाष्ठा होती है, वैसे ही ढलते हुए सूरज की सुंदरता भी, अपने आप में अप्रतिम होती है!

हो न जाये खस्ताहाल मेरी याद इससे पहले तुम चले आना… न रहा ज़ोर अब सदाओं में

न होता अब पुकारा जाना.. ख़त न कोई और ही निशानी तेरी है फ़क़त तसव्वुर में तेरा ठहर जाना… न जाने कहां गुम है देखो न रब मेरा उधर तुम्हारी रुख़्सती इधर इनका मुँह फेर लेना…

रिश्तों का भी गज़ब नियम है*…. जब तक कर्तव्य मेरे और अधिकार दूसरो के है सब अपने है। जिस दिन अधिकार मेरे और कर्तव्यों की आशा दूसरो से की, सब अपने भी पराये हो जाते है

अपनी ही एक ग़ज़ल से कुछ यूँ ख़फ़ा हूँ मैं ज़िक्र था जिस बेवफ़ा का, वही बेवफ़ा हूँ मैं। महफ़िल ना सही तन्हाई तो मिलती है, मिलें ना सही जुदाई तो मिलती है, प्यार में कुछ नहीं मिलता.. वफ़ा न सही बेवफाई तो मिलती है।

झांखकर देखा होता एक बार तो डोली के अंदर, के हो गया हैं अब मेरी भी ज़िंदगी का पूरा सफर तेरे साथ साथ अब मेरी भी मंज़िल ख़त्म हो गयी बताने ना दिया तूने और कह दिया तू बेवफा हो गयी! ?

बेवफा तो वो खुद थी, पर इल्ज़ाम किसी और को देती है, पहले नाम था मेरा उसके होठों पर, अब वो नाम किसी और का लेती है, कभी लेती थी वादा मुझसे साथ ना छोड़ने का, अब यही वादा किसी और से लेती है!!

वो मोहब्बत भी तेरी थी, वो नफ़रत भी तेरी थी, वो अपनाने और ठुकराने की अदा भी तेरी थी, मे अपनी वफ़ा का इंसाफ़ किस से माँगता.. वो शहेर भी तेरा था, वो अदालत भी तेरी थी! ?

दिल का दर्द एक राज बनकर रह गया, मेरा भरोसा मजाक बनकर रह गया, दिल के सोदागरो से दिल्लगी कर बैठे, शायद इसीलिए मेरा प्यार  इक अल्फाज बनकर रह गया। ?

मोहबत को जो निभाते हैं उनको मेरा सलाम है, और जो बीच रास्ते में छोड़ जाते हैं उनको, हमारा ये पेगाम हैं.. वादा-ए-वफ़ा करो तो फिर खुद को फ़ना करो, वरना खुदा के लिए किसी की ज़िंदगी ना तबाह करो!

अपनी प्यारी आँखों मे छूपालो मुझको, मोहब्बत तुम से हैं चुरालो मुझको, धूप हो या सेहर तेरा साथ चलेंगे हम, यक़ीन ना हो तो आज़मा लो मुझको, तेरे हर दुख को सह लेंगे हंस के हम, अपने वजूद की चादर बना लो मुझको, ज़िंदगी भी तेरे नाम कर दी है हमने, बस चंद लम्हे सीने से लगा लो मुझको!!