Opinion

शिवसेना की  निरंकुश राजनीति ने कंगना को बनाया

“झाँसी की रानी”

सामान्यत गन्दगी में फंसगया व्यक्ति प्रायः उस गन्दगी से समझौता कर के एकरस हो अपनी नियति मानकर जीवन जीने लगता हैं ,परन्तु कुछ भी हो उस गन्दगी को रहकर प्रतिष्ठा ,यश, वैभव यहाँ तक की वह सब कुछ जिसे जीवन का हम भौतिक लक्ष्य मान कर जीते हैं , उसे पाकर भी उस गन्दगी से एकरस नही हो पाई | यही बात कंगना को जहाँ भिन्न, विशिष्ठ और श्रेष्ठ बनाती है वही दूसरी और जिस राष्ट्रप्रेम और भ्रष्टाचार के निरोध के लिए प्रसिद्ध शिवसेना सत्ता लाभ और अहंकार के लिए भ्रष्टतंत्र की गुलाम होकर पतन की और उन्मुख हो रही हैं |

आज महाराष्ट्र की निरंकुश राजनीति ने मुझे भी अपने विचार व्यक्त् करने को विवश कर दिया है | महाराष्ट्र में सत्तालोलुप और भ्रष्टतम दलों की गठबंधन सरकार अपनी निम्नता की हदें पार करती जा रही है | हिंदुत्व और न्याय की ध्वजवाहक शिवसेना  सत्ता लोभ की लोलुपता में आज इतनी गिर गयी है कि शिवसेना कभी जिनका विरोध अथवा जिनके विरुद्ध संघर्ष किया करती थी , आज वही शिवसेना उन्हीं के हाथो का खिलौना है | महाराष्ट्र की सरकार जोकि एक भ्रष्ट तंत्र के हाथो कठपुतली की भांति खेल रही हैं , अपने भ्रष्ट्रतंत्र को प्रसन्न रखने के लिए जनभावनाओं के विरुद्ध कार्य करने में भी नही हिचक रही वरन   जनभावनाओं के कुचलने के लिए एक माफिया की तरह कार्य कर रही है | महाराष्ट्र सरकार दमनकारी नीति का पर्दाफाश सुशान्त हत्याकांड के बाद पूरी दुनिया  में तब हुआ जब सरकार ने हत्या के तथ्यों को छिपाने के लिए ज्यादा दिलचस्पी दिखाई और  प्राप्त सबूतों को मिटाने में लगी रही और इससे भी एक कदम आगे आरोपियों को संरक्षण प्रदान करने की कार्यशैली से सामान्य से सामान्य व्यक्ति भी समझ सकता है कि कुछ न कुछ गड़बड़ है , और सफेदपोशों को संरक्षण दिया जा रहा है |

इस केस में जब – जब जिसने – जिसने अपनी आवाज़ उठाई उसे कुचलने के लिए हर संभव प्रयास किये जा रहे हैं, संस्था, व्यक्ति, जनभावना या मीडिया हॉउस ही क्यूँ न हो सबके साथ सरकार की दमनकारी  नीति जारी है ऐसा लग रहा है कि शिवसेना की ठाकरे सरकार ने राजनीति का उच्चतम शिखर प्राप्त कर लिया हो , भविष्य में उसे राजनीति करनी ही न हो , ठाकरे जी का मुख्यमंत्री बनना ही उनका व उनकी राजनीति का अंतिम लक्ष्य था | भ्रष्टाचार और माफ़िआओ के विरुद्ध कंगना के संघर्ष के दमन से और आगे, तथ्यों को छिपाने तक तथा सार्वजानिक स्वीकार्य आरोपी रिया चक्रवर्ती का अतिशय संरक्षण सरकार को संदेह के घेरे में लाती है | तो इसके लिए सरकार की अहंकारपूर्ण नीतिया ही जिम्मेदार मानी जाएँगी ना कि कोई और ? अपने अहंकार के नशे में चूर सरकार यह नही देख पा रही है कि एक सामान्य नागरिक की आवाज़ दबाने में सरकार पूर्णरूप से असफल हो गयी | अलोचनाओ का शिकार हो कर सरकार ने कंगना के लिए समर्थन व सहानुभूति का देशव्यापी वातावरण निर्माण कर दिया | उस वातावरण को तोडना ठाकरे सरकार के लिए असम्भव सा होता जा रहा है | सम्भावना इसी बात की है की महाराष्ट्र में इस घटना का पटाक्षेप कुछ बड़ा होकर ही होगा |

जो शिवसेना हिंदुत्व और न्याय के लिए जानी जाती थी वर्तमान में उस सरकार में हालत ये हो गयी कि यदि आपको भारत में रहने से डर लगता है तो आप इंटेलेक्चुअल हैं | परन्तु आप गलती से भी यह बोल दें कि आप को भारत के किसी विशेष राज्य में रहने से डर लगता हे तो आपको देशद्रोही बन सकते हैं | अगर आप देश के राष्ट्रीय न्यूज़ चैनल पर देश के प्रधानमंत्री को गलियां देते हैं ,उनसे तू तडाक की भाषा का प्रयोग करते हैं तो ये आपकी अभिव्यक्ति की आज़ादी है | परन्तु अगर आप  देश के सबसे बड़े निकम्मे वंश के बारे में कुछ कहेंगे तो हरामखोर की उपाधि दे दी जाएगी | यदि आप हिमांचल या पटना से मुंबा देवी के दर्शन के लिए आते हैं तो आपको कोरान्टीन कर दिया जायेगा लेकिन अगर आप टर्की  की प्रथम महिला से मिल के आयेगे तो आपको बिना चेक – आप को  फ्री घुमने की आज़ादी है | यदि आप कोई जगह खरीद कर वहां किचन कह कर टॉयलेट बनवायेंगे तो मुनिसिपलिटी आपका घर तहस नहश कर देगी लेकिन अगर आप बीच सड़क पर कब्ज़ा कर के अपना घर बना लेंगे तो पूर्णतः उचित है | जब एक भीड़ एकत्रित होकर पहलूखान की न्रिशंश हत्या करती है तो देश के प्रधानमंत्री और संस्कृति पर ऊँगली उठाई जाती है परन्तु जब किसी षड्यंत्र के तहत निर्दोष एवं वृद्ध साधुओं की पीट – पीट कर हत्या की जाती है या एक भारतीय CBI अधिकारी की चाकुओं से गोद कर निर्मम हत्या की जाती हे तो ये सामान्य कानून व्यवस्था मानी जायेगी | जब देश के किसी नागरिक को कहा जाता है की उसे किसी विशेष राज्य में आने की अनुमति नही है तो वह ठीक है, लेकिन जब देश का गृहमंत्री विदेशियों के लिए CAA का प्रस्ताव लाता है तो उसे खलनायक बना दिया जाता है | जब ड्रग आरोपी को NCB गिरफ्तार करती है तो ये सब पेट्रियार्की चिल्लाते हैं लेकिन जब अपने अहंकार को संतुष्ट करने के लिए एक सरकार एक औरत की प्रापर्टी को विद्ध्वंश करती है तो इनके मुह में दही जम जाता है | जब एक वृद्ध पिता के बार बार कहने पर भी पुलिस FIR दर्ज नही करती क्यूंकि पुलिस उसे न्याय संगत नही मानती , परन्तु जब एक संदिग्ध आरोपी पीड़ित की बहन के विरुद्ध FIR दर्ज कराती है तब वह न्यायसंगत हो जाता है |

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