Yaad

बहुत दूर है मेरे शहर से तेरे शहर का किनारा; फिर भी हम हवा के हर झोंके से तेरा हाल पूछते है।

तुम्हारी याद के सहारे जिए जाते हैं; वरना हम तो कब के मर गए होते; जो जख्म दिल में नासूर बन गए; जख्म वो कब के भर गए होते।

यादों को भुलाने में कुछ देर तो लगती है; आँखों को सुलाने में कुछ देर तो लगती है; किसी शख्स को भुला देना इतना आसान नहीं होता; दिल को समझाने में कुछ देर तो लगती है।

अकेला सा महसूस करो जब तन्हाई में; याद मेरी आये जब जुदाई में; महसूस करना तुम्हारे करीब हूँ मैं; जब चाहे देख लेना अपनी ही परछाई में!

हर लम्हा हम उन्हें याद करते रहे; उनकी याद में मर-मर के जीते रहे; अश्क़ आँखों से हमारी बहते रहे; जुदाई में उनकी हम अश्क़ों के जाम पीते रहे।

आज भी सूना पड़ा है हर एक मंज़र; तेरे जाने से सब कुछ वीरान लगता है; उस रास्ते पे आज भी हम तेरी राह देखते हैं; जहाँ से तेरा लौट आना आसान लगता है।

थक गए हम उनका इंतज़ार करते-करते; रोए हज़ार बार खुद से तकरार करते-करते; दो शब्द उनकी ज़ुबान से निकल जाते कभी; और टूट गए हम एक तरफ़ा प्यार करते-करते।